वो मलमल का कुर्ता…

Silence Speaks💕
2 min readApr 4, 2020

--

ये भीनी खुशबू इस मलमल के कुर्ते से
जो निकला आज एक पुराने लकड़ी के सन्दूख से
जी रहा है आज भी यह क्योंकि
मुलाक़ात हो रही है इनमे बेशुमार एहसासों की

वो एक बारिश की रात थी
और भागे थे पेड़ किनारे
वो दूर कहीं किसी घर से निकली धुएं की दौड़ रे
इस मलमल के कुर्ते से आ रही है वो ख़ास खुशबू आज भी

वो खुली हथेलियों में मोगरे की कलिययाँ हैं
कुछ धुँधली होती हुई मेहँदी की लकीरें हैं
दोनों कलाईयों में घुँघरूओं वाली चूडरियाँ हैं
आज भी वो खनक इस मलमल के कुर्ते के साथ हैं

ये कुर्ता हैं गवाह उन अंगड़ाइयों का
जो जाड़ों की सुबह में धुप के सामने ली जातीं थीं
वो अंगीठी के कोयले से बचने, उनकी उंगलिययाँ सेहम जाती थी
वो पानी पीकर इस कुर्ते के दामन से अपना मुँह पोछती थी

इस मलमल के कुर्ते पर वो फूलोंवाला दुपट्टा
और जो खेल रही है वो, बांधकर दुप्पट्टा कमर पर कसकर
वो चेहरे पर शौखी, और होंठों पर मुस्कराहट का दायरा है
वो चीखना और उछालना और जीतने का जश्न है

और फिर इस कुर्ते को धोकर सुखाना हो
वो ज़्यादा काजल आंखों से हटाना हो , या फिर रोते बच्चे के आंसूओं को पोंछना हो
वो देर से घर पहुंचने पर, कुर्ते के दामन पर उँगलियाँ घूमाना हो
और हाँ, फिर अकेले वक़्त में उनकी जेबों में हाथ डालकर उन सुनहरी यादों को टटोलना हो

हैं न ये मलमल का कुरता ख़ास यादों से लबरेज़
और मौसम, जश्न, लोगों, इत्र, ज़ाफ़रान, और फूलों की खुशबू से भीगा हुआ
इस मलमल के कुर्ते मैं है सारी ज़िंदगानी मेरी
वापिस रख दूँ इसको सन्दूख में, किसी दिन फिर किसी महफ़िल की याद दिलाने…

--

--

Silence Speaks💕
Silence Speaks💕

Written by Silence Speaks💕

Not chasing popularity, but delving into the depths of the human mind. | Stained Glass & Mosaics | Ms. Introvert | Writer | A dainty entrepreneur |

No responses yet